Tarz-e-Amal
बादशाह भी ख़ुदा के सामने झुके
और मज़लूम भी झुके गुनहगार के आगे,
कलाकार भी कला के आगे झुके,
इंक़लाबी भी झुके इंक़लाब के आगे।
बच्चा भी बुज़ुर्ग के आगे झुके,
शेर भी झुके नज़्म के आगे,
माशूक़ भी महबूबा के आगे झुके,
जैसे इंसान झुके क़ायदे के आगे।
दीवाना भी रब के आगे झुके,
जहाज़ भी झुके बवंडर के आगे,
लाश भी क़ब्र के आगे झुके,
बाग़ी न झुके क़ायनात के आगे।
Leeza
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