"मन की बात से मनमानी की बात "
मन की बात से मनमानी से हुए देश को आघात तक के सफर ने जब सत्ता में रहने के पागलपन से बिदकl दिया तानाशाह के अंतरमन को तो लोकतंत्र की चिता पर, संघी विचारधाराओं के विचार विरोधी तत्वों ने फैलाया आतंक अपनी कब्र खुद खोदी राजा ने, जब किया संविधान के मूल्यों का हनन l धीरे-धीरे बहरे भी सुनने लगे धीरे-धीरे अंधों ने भी चश्मा पहना धीरे-धीरे गूंगे भी बोलने लगे धीरे-धीरे मूर्ख भी सोचने लगे l कि कैसे हो रहा है एक आज़ाद भारत में शिक्षा, रोज़गार और जनाधिकारों का हश्र-नश्र? स्मृति में रहे मनमोहन, स्मृति में रहे शास्त्री जी को किया गया नमन क्या राम के नाम पर कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए ही चाहिए इन्हें बस राम की शक्ल? क्या जातिभेद और फूट डालकर राज करना ही है इस सरकार की राजनीतिक अकल? और जब फूट न डाल पाएं, तो सलाखों के पीछे डाल दो और अगर फिर भी कोई चिल्लाए, तो उसे देश विरोधी तत्व नाम दो उससे भी न बने, तो उसके धरम पर वार दो और अगर वो हिंदू निकले, तो उसकी नागरिकता का हिसाब लो l कोई चुनाव में मत न दे, तो उसका मत ही काट दो मतदाताओं की सूची में से, उसका लोकतांत्रिक हक़ ही मार दो कहते-कहते मर गए, बुद्धिजीवी कि इन...