आज मैं कविता को कोसती हूँ
आज मैं कविता को कोसती हूँ
1] मैं बात करने से पहले
कविता कर देती हूँ,
और फिर मेरी बात और मेरी कविता
दोनों अधूरी रह जाती हैं।
2] मैं कौन हूँ से
मैं कैसे वो रहूँ
जो मैं असल में हूँ?
एक इंसान का
सबसे मुश्किल सफ़र है,
जो उसे सबसे पहले तय करना होता है।
3] काश मैं कवि बनने से पहले
इंसान बन पाती।
पर अगर मैं कवि नहीं बनती,
तो क्या मैं कभी इंसान बन पाती?
4 ]ये ज़माना चंद तालियों के बदले
मुझसे मेरा फ़न लेना चाहता है।
लेना चाहता है तो ले ले,
कुछ शब तो मैं भी चैन से सो सकूँ।
5] ये ख़यालात मुझे पागल ही न कर दें,
ये वारदात मुझे गुनहगार ही न कर दें,
ये फ़ासले हमें जुदा ही न कर दें,
ये कविता मुझे कलाकार ही न कर दे।
6] क्यों रोज़ मैं ख़ुद को कोसू,
आज मैं कविता को कोसती हूँ।
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