त्राहिमाम


1) गंगा नहाने से करम नहीं धुलते जनाब,
 हाँ गंगा ज़रूर मैली हो जाती है।


2) मेरे मन में कोई तो ग़म आसरा है, 
जो सारे आनंदों पर भारी पड़ रहा है।

3) ये सन्नाटा मुझे निगल क्यों नहीं लेता, 
ये अकेलापन मुझे मार क्यों नहीं डालता, 
ये प्रेम मुझसे आत्महत्या क्यों करवाता, 
ये पाखंड मुझे रास क्यों नहीं आता?


4) काश प्रेम, विवाह-सा आसान होता, 
काश प्रेम-विवाह भी आसान होता।

Leeza
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