वैचारिक कौतूहल
वैचारिक कौतूहल
1) विरोधभास अधिकतर मनुष्यों को मानसिक रूप से विचलित करने की क्षमता रखता है .जिस व्यक्ति ने विरोधाभास को स्वीकार लिया उसने जीवन की जटिलताओं का आलिंगन कर लिया |
2) मनुष्य का असली मुकदमा अस्तित्ववाद का मुकदमा होता है , और ईश्वर का असली मुकदमा अस्तिववlत का होता है
3) मानवीय जीवन असुरक्षित , विस्मयकारी और खोखला होता हैं |
4) वास्तविक जीवन और काल्पनिक जीवन का एक मातृ अंतर हैं की कल्पना मे मनुष्य कभी मरता नही है l
1) विरोधभास अधिकतर मनुष्यों को मानसिक रूप से विचलित करने की क्षमता रखता है .जिस व्यक्ति ने विरोधाभास को स्वीकार लिया उसने जीवन की जटिलताओं का आलिंगन कर लिया |
2) मनुष्य का असली मुकदमा अस्तित्ववाद का मुकदमा होता है , और ईश्वर का असली मुकदमा अस्तिववlत का होता है
3) मानवीय जीवन असुरक्षित , विस्मयकारी और खोखला होता हैं |
4) वास्तविक जीवन और काल्पनिक जीवन का एक मातृ अंतर हैं की कल्पना मे मनुष्य कभी मरता नही है l
5) मनुष्य जीवन का अर्थ निकालकर स्वयं को स्वयं की जान लेने से रोके रखने के लिए अथक प्रयास करना औऱ स्वयं को कार्यो और विचारो में ग्रस्त रखना. जब व्यक्ति कम कार्यो और अधिक्तर विचारो के घेरे में फसता निकालकर , तो या तो वो समाज मे कमियां निकालकर दूसरो को दुःखी करता निकालकर , या ख़ुदमे कमीं निकालकर स्वयं की आत्महत्या कर डालता हैं l
6) वैचारिक वार्तालाप का वास्तविक निष्कर्ष प्रश्नों और परिप्रेक्ष्य की पृष्ठभूमि ही तय करता हैं l
Leeza
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