Posted by
Leeza Sharma
बेईमानी की क्या बात
जनतंत्र के दाह संस्कार में
संविधान रो दिया
भ्रष्टाचार के व्यापार में
बेईमान बड़ा खुश हुआ
जब तक बेईमान के घर आग न लगी थी
तब तक वो बेफिक्र था
और जब उसके घर आग लगी,
तब तक समाज में ईमानदारों का कोई ज़िक्र न था।
ईमानदार चढ़ गए सूली
बेईमानी का जलसा हुआ
जुलूस बनाया गया, मुख़्लिसों का
और बेईमान अफसर हुआ
ईमानदारों का ट्रांसफर हुआ
बेईमानों को मिली तरक्की
तो सब बने बेईमान,
ईमानदारी का फिर कभी सरकारी दफ्तारों में ज़िक्र न हुआ।
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